6 जून 2019 - 13:06
अमरीका पतन का शिकार हैः वरिष्ठ नेता

इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनेई ने कहा है कि प्रतिरोध, ज़ोर ज़बरदस्ती करने वाली शक्तियों के मुक़ाबले में अपनी प्रतिष्ठा और सम्मान की रक्षा करने का बेहतरीन तरीक़ा है और प्रतिरोध की वजह से दुश्मन पीछे हटने पर मजबूर होता है। उन्होंने कहा कि अमरीका पतन का शिकार है और ट्रम्प जैसे व्यक्ति का अमरीका में राष्ट्रपति बनना इस देश के पतन की स्पष्ट निशानी है।

इस्लामी गणतंत्र ईरान के संस्थापक स्वर्गीय इमाम ख़ुमैनी की 30वीं बरसी के कार्यक्रम में लाखों की संख्या में शामिल लोगों को संबोधित करते हुए वरिष्ठ नेता ने कहा कि इमाम ख़ुमैनी के स्वर्गवास को 30 साल गुज़र जाने के बाद भी पवित्र रमज़ान की दोपहर और इस गर्म मौसम में इतनी बड़ी संख्या में लोगों का यहां एकत्रित होना इमाम ख़ुमैनी के आकर्षण का एक स्पष्ट उदाहरण है। 

उन्होंने कहा कि कुछ दिन पहले दुनिया ने इमाम ख़ुमैनी के व्यक्तित्व के प्रभाव देखे अर्थात विश्व क़ुद्स दिवस में पूरी दुनिया में लोगों ने व्यापक स्तर पर रैलियों में भाग लिया। वरिष्ठ नेता ने कहा कि इमाम ख़ुमैनी ने चालीस साल पहले विश्व क़ुद्स दिवस की घोषणा की थी किन्तु आज विश्व क़ुद्स दिवस हर साल से अधिक भव्य ढंग से मनाया जा रहा है और इस साल विश्व क़ुद्स दिवस दुनिया के सौ देशों में मनाया गया।

इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने इमाम ख़ुमैनी की विशेषताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इमाम ख़ुमैनी की एक विशेषता प्रतिरोध था। उन्होंने कहा कि जिस चीज़ ने इमाम ख़ुमैनी को एक दृष्टिकोण के रूप में इतिहास में पेश किया वह प्रतिरोध और डटे रहना तथा समस्याओं और शैतानी शक्तियों के मुक़ाबले में पूरी शक्ति के साथ डट जाना था। 

उन्होंने कहा कि इमाम ख़ुमैनी शैतानी शक्तियों के मुक़ाबले में तनिक भी पीछे नहीं हटे बल्कि हमेशा डटे रहे और चाहे वह भीतरी शैतानी शक्ति को या विदेशी शैतानी शक्ति हो।

आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनेई ने कहा कि प्रतिरोध धीरे धीरे ईरान की सीमाओं से भी बाहर निकल गया, यह स्वयं ही बाहर निकला यद्यपि विदेशी नेता हम पर यह आपत्ति करते हैं कि हम क्रांति क्यों निर्यात कर रहे हैं किन्तु ऐसा नहीं है, विचार और राजनीति यदि सही हो तो राष्ट्र स्वयं ही उसको अपना लेते हैं।

आज दुनिया के राष्ट्रों का संयुक्त नारा प्रतिरोध है, सब प्रतिरोध को अपना रहे हैं। वरिष्ठ नेता ने कहा कि अमरीकियों को पिछले कुछ वर्षों के दौरान इराक़, सीरिया और अन्य स्थानों पर जिस पराजय का सामना करना पड़ा है वह इसी प्रतिरोध का परिणाम है और आज क्षेेत्र के राष्ट्रों ने यदि प्रतिरोध का रास्ता अपनाया है तो उन्होंने ईरानी जनता से इस रास्ते को अपनाया है। 

वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनेई ने कहा कि महत्वपूर्ण बात यह है कि इमाम ख़ुमैनी ने, प्रतिरोध का रास्ता भावनात्मक ढंग से नहीं चुना बल्कि उन्होंने तर्क, बुद्धि और धर्म के आधार पर प्रतिरोध का चयन किया क्योंकि प्रतिरोध ही ज़ोर ज़बरदस्ती करने वाली शक्तियों के मुक़ाबले में अपनी प्रतिष्ठा और सम्मान की रक्षा करने का बेहतरीन रास्ता है और प्रतिरोध की वजह से दुश्मन पीछे हटने पर मजबूर होता है। 

वरिष्ठ नेता ने कहा कि इस्लामी गणतंत्र ईरान के चालीस वर्षीय काल में भी अनुभवों ने सिद्ध किया कि जब भी हमने प्रतिरोध का प्रदर्शन किया हम आगे बढ़े हैं। उन्होंने कहा कि दुश्मन के सामने झुकने की भी भारी क़ीमत चुकानी पड़ती है जिस प्रकार से अतीत में ईरान की शाही सरकार को और आज सऊदी सरकार को दुश्मन के सामने सिर झुकाने की क़ीमत चुकानी पड़ रही है। उसका अपमान किया जा रहा है और सऊदी अरब को दूध देने वाली गाए कहा जाता है। 

आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामनेई ने कहा कि इमाम ख़ुमैनी ने इस ईश्वरीय वचन को अपने दृष्टिगत रखा था और इमाम ख़ुमैनी ने सिद्ध कर दिया कि प्रतिरोध एक संभव काम है और सामने वाले पक्ष की विदित शक्ति से नहीं डरना चाहिए।

वरिष्ठ नेता ने कहा कि जो लोग यह कहते हैं कि हम बड़ी शक्तियों का मुक़ाबला नहीं कर सकते, यह अनुमानों की ग़लती है, यदि हम विश्व साम्राज्यवाद के मुक़ाबले में प्रतिरोध का प्रदर्शन करना चाहते हैं तो हमें उस प्रतिरोध को अपने दृष्टिगत रखना चाहिए जिसका प्रदर्शन इमाम ख़ुमैनी ने किया था और ख़ुर्रमशहर की स्वतंत्रता के बाद अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर इमाम ख़ुमैनी के प्रतिरोध की रणनीति के रूप में सामने आया था, अर्थात आधुनिक हथियारों के बिना करोड़ों लोगों के अंदर अपना प्रभाव पैदा करना और इस चीज़ को पश्चिमी विश्लेषकों ने स्वीकार भी किया था। 

इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने कहा कि ईरान के बाक़ी रहने का रहस्य यही प्रतिरोध है जिसका पाठ इमाम ख़ुमैनी ने हमें दिया है। उन्होंने कहा कि आज क्षेत्र और क्षेत्र से बाहर, प्रतिरोध का मोर्चाा पिछले चालीस वर्षों की तुलना में सबसे अधिक व्यवस्थित है। उन्होंने कहा कि इसके मुक़ाबले में अमरीका और इस्राईल धीरे धीरे कमज़ोर हुए हैं।

इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने कहा कि कुछ अमरीकियों ने स्वयं यह वास्तविकता स्वीकार की है कि अमरीका अंदर से राजनैतिक, आर्थिक और सामाजिक दृष्टि से खोखला हो रहा है। वरिष्ठ नेता ने राजनैतिक मैदान में अमरीका के पतन का उल्लेख करते हुए कहा कि इसका एक कारण डोनल्ड ट्रम्प जैसे व्यक्ति का राष्ट्रपति पद के लिए चुना जाना है क्योंकि अमरीका के तीन सौ मिलियन से अधिक लोगों का भविष्य जब ट्रम्प जैसे भ्रष्ट और बौद्धिक रूप से असंतुलित व्यक्ति के हाथ में आ जाए, तो यह प्रतीत होता है कि अमरीका पतन का शिकार है।

इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने कहा कि ट्रम्प प्रशासन, ज़ायोनी शासन के अपराधों और यमन पर होने वाले पाश्विक हमलों का समर्थन कर रहा है तो इससे बढ़कर राजनैतिक पतन और क्या हो सकता है। उन्होंने कहा कि इसके मुक़ाबले में इस्लामी गणतंत्र ईरान और ईरान की जनता है जिनके पास राजनैतिक सूझबूझ और समझदारी तथा कर्मक्षेत्र में उनकी उपस्थिति है।
वरिष्ठ नेता ने कहा कि प्रतिरोध का लक्ष्य आर्थिक, राजनैतिक, सामाजिक और रक्षा के क्षेत्र में ऐसे स्थान पर पहुंचना है कि दुश्मन हम को किसी भी प्रकार से नुक़सान पहुंचाने का साहस न कर सके और आज रक्षा तथा सामरिक क्षेत्र में हम जिस उच्च स्थान पर पहुंच चुके हैं, दुश्मन भी उसको अच्छी तरह समझता है और हमें रक्षा क्षमताओं से वंचित करने का प्रयास कर रहा है किन्तु वह कभी ऐसा नहीं कर सकेगा।